मेरे लोगों को जाने दो






संबंधित प्रश्नोत्तर
मूसा का जीवन कैसे हमें दिखाता है की परमेश्वर हमारा इस्तेमाल कर सकते है?
मूसा का जीवन कैसे हमें दिखाता है की परमेश्वर हमारा इस्तेमाल कर सकते है?
परमेश्वर हमारे द्वारा दूसरों की मदद कर सकते है। मूसा ने गलत किया था और वे बहुत कारण देते थे। पर परमेश्वर ने उन्हें तैयार किया था इस्राइलीयों को मिसर से बाहर ले जाने के लिए। मिसर में एक राजपुत्र के नाते, उसने बहुत सारे नेतृत्व के कौशल भी सीखे। जब वह भाग कर मिद्यान देश गया, उसने बहुत साल देश के बारें सीखने में बिताए। वह अंतत: इसराईली लोगों को इस देश से लेकर गया।
परमेश्वर हमारे द्वारा दूसरों की मदद कर सकते है। अगर आप को परमेश्वर के लिए कुछ भी करना है, चाहे कितनी भी छोटी बात क्यों न हो, बिना कारण दिए कीजिए। इस के बजाय, परमेश्वर पर विश्वास रखे की उस कार्य को पूरा करने के लिए वह आप की सहायता करेंगे। उदाहरण के तौर पर, अगर आप को ऐसा लगे की परमेश्वर चाहते है की आप किसी तनहा व्यक्ति से बात करें, कोई बहाना मत बनाना की आप शरमीले है या फिर आप उस व्यक्ति की उतना नहीं जानते। परमेश्वर आप के साथ रहेंगे (निर्गमन 4:12)।
मूसा और हारून को क्यों परमेश्वर ने एक गुट जैसा काम करने को कहा?
मूसा और हारून को क्यों परमेश्वर ने एक गुट जैसा काम करने को कहा?
बहुत लोगों को अकेले काम करना पसंद है। गुट में काम करने के लिए नम्रता, सहनशीलता और सहिष्णुता जरूरी है। गुट का हिस्सा होने पर, आप दूसरों के साथ काम करना सीखते है (1 कुरिन्थियों 12:27)। एक दूसरों के साथ बांटने से और काम करने से, मूसा और हारून बहुत ज्यादा कर पाए (रोमियो 12:4-5)। परमेश्वर को आपके गुट का मुख्य बनाना मत भूलना।
फिरौन के हठीले स्वभाव से हम क्या सीख सकते है?
फिरौन के हठीले स्वभाव से हम क्या सीख सकते है?
परमेश्वर ने फिरौन से मूसा आर हारून द्वारा बात की, पर फिरौन ने सुनने से इनकार कर दिया। इस कारण फिरौन को कष्ट उठाना पड़ा। इसराईली लोगों ने मिसर से मुक्ति के बारें में परमेश्वर के वचन को सुना (निर्गमन 6:6-8), और उन्होने किया। परमेश्वर ने इसराईली लोगों को चेतावनी और वचन दोनों दिए: “कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा;;
आप परमेश्वर पर भरोसा रख सकते है की जो वे कहते वही करते है। बाइबल में लिखित हर एक चेतावनी और वचन पर आप विश्वास रख सकते है। जब परमेश्वर बात करते है, ध्यान से सुने।
परमेश्वर के इस्रायल को जो निर्देश दिए उन से हम क्या सीख सकते है?
परमेश्वर के इस्रायल को जो निर्देश दिए उन से हम क्या सीख सकते है?
परमेश्वर के निर्देश हमें सिखाते है की हमें सही करना चाहिए। परमेश्वर ने हमें बाइबल में एक सुयोग्य जीवन जीने के लिए चेतावनियां और निर्देश दिए हुए हैं। (2 तीमुथियुस 3:16)। उदाहरण के तौर पर, परमेश्वर आप को मूर्ति पूजा के खिलाफ चेतावनी देते है (निर्गमन 20:3-5), चुगली/लुतराइ (नीतिवचन 20:19), गन्दी बात करना(इफिसियों 4:29), झूठ बोलना(नीतिवचन 6:16-19)। वो आपको निर्देश देते है की उन से पूरे हृदय से प्रेम करें (मत्ती 22:37), एक दूसरे को दया दिखाए और क्षमा करें (इफिसियों 4:32), और अपने जैसा अपने पड़ोसी के साथ प्रेम रखे (मत्ती 22:38)। परमेश्वर के निर्देशों का पालन करना भी उनके प्रति हमारे प्रेम को दर्शाता है (यूहन्ना 14:23)। सबसे महत्वपूर्ण, परमेश्वर ने वचन दिया है की वे उनकी मदद करेंगे जो उनके पीछे चलते है। परमेश्वर का पवित्र आत्मा आप के अंदर निवास करता है और हर दिन आप की सहायता कर सकता है (John:14:16, Ezekiel:36:26-27, Philippians:2:13).
सतह पर असंभव दिखने वाली परिस्थिति को हम कैसे संभालते है जैसे मूसा के सामने लाल समुद्र था?
सतह पर असंभव दिखने वाली परिस्थिति को हम कैसे संभालते है जैसे मूसा के सामने लाल समुद्र था?
असंभव दिखने वाली परिस्थिति में भी परमेश्वर पर भरोसा रखे। इसराईली लोग ऐसी परिस्थिति में थे जो दिखने में असंभव थी। वे लाल समुद्र और मिसरी सैनिकों के बीच में फंसे हुए थे। परंतु परमेश्वर, असंभव बातों का परमेश्वर है। वह अपनी प्रजा को छुड़ाते है(निर्गमन 15:2)। वह ये भी चाहते हैं कि आप भय के बदले अपने मन में विश्वास रखें। हर परिस्थिति में परमेश्वर की मदद पर विश्वास रखो, इस से फरक नहीं पड़ता की चीज़ें कितनी भी मुश्किल लगे।
क्यू एंड ए